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बड़े नोट बंद होने से ट्रक ट्रांसपोर्ट प्रभावित

Published On Nov 15, 2016By लिसा प्रधान

देश में हालिया 500 रुपये व 1000 रुपये के बड़े नोट बंद होने की पीड़ा सिर्फ़ आम आदमी को ही नहीं उठानी पड़ रही है, बल्कि इसके भागीदार ट्रकिंग इंडस्ट्री भी बन गयी है। ट्रांसपोर्टेशन और लॉजीस्टिकस के बिज़नेस से जुड़े फ्लीट ऑपरेटर्स के मुताबिक, भारतीय सड़कों पर दौड़ने वाले तीन मिलियन ट्रक्स में से 90 प्रतिशत से ज़्यादा ट्रक्स आज पिछले दो दिन से अपनी जगह पर खड़े हैं, जो की देश में सप्लाइ होने वाली रोज़मर्रा की सामग्री के लिए गंभीर ख़तरा है।

ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर, एक ऐसी इंडस्ट्री जो की करीब 20 करोड़ लोगों को रोज़गार देती है, आज सरकार द्वारा बड़े नोट बंद किए जाने का खामियाज़ा भुगत रही है। क्योंकि बड़े नोट फ़्यूल आउटलेट्स, टोल प्लाज़ा, मज़दूरों व ढाबा मालिकों द्वारा नही स्वीकार किए जा रहे हैं। रोड ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री में करीब 80 प्रतिशत की ऑपरेशनल कॉस्ट केश द्वारा ही की जाती है।

इस के अलावा, 20000 प्रति सप्ताह की आहरण सीमा (विथड्राअल लिमिट) ने तो जैसे इस सेक्टर की कमर ही तोड़ दी। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कॉंग्रेस (एआईएमटीसी) के अनुसार दूध सप्लाइ, दवाएँ, सब्ज़ियाँ व फल आने वाले दिनों में इस की मार झेलेंगे। कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया दिल्ली ट्रांसपोर्टेर्स असोसियेशन ने भी व्यक्त की है। उसने कहा है की रोड ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में बड़े पैमाने पर केश ट्रांसेक्शंस से ही काम चलता है। जैसे की ट्रक ड्राइवर्स की रोज़ की हाथ खर्ची व खाने का खर्च, ब्रेक डाउन के समय में रेपैयर का खर्चा और लोडर और अनलॉअडर्स का पेमेंट।

नोयडा स्थित फ्लीट ओनर, श्री सचिन मांन ने अपना दुखड़ा ट्रक्स देखो को बताया. "मेरे पास करीब 30 से 40 ट्रक्स हैं जो की दिल्ली / एनसीआर क्षेत्र व देश के साउथ शहरों जैसे हैदराबाद, चेन्नई, बेंगालुरू के बीच चलते हैं। मुझे मेरे हर एक ड्राइवर को रोज़ाना 20,000 रुपये नकद देने पड़ते है।. यहाँ प्रति दिन की जो लिमिट रखी गयी है वह काफ़ी कम है उस के अलावा ड्राइवर को 2,000 रुपये के नये नोट का कोई खुल्ला पैसा नहीं देता। इसलिए हाल फिलहाल मेरे सारे व्हीक्ल्स खाली खड़े है।"

देखा जाए तो पुराने हो चुके नोटों को अस्पताल, पेट्रोल पंप्स, मेडिकल स्टोर्स और रेलवे टिकेट काउंटर पर स्वीकार करनी की अवधि पिछली 11 नवंबर से बढ़ा कर 14 नवंबर कर दी गयी है, परंतु छोटे शहरों में रह रहे लोगों ने बढ़ी हुई मियाद के बारे में जानकारी ना होने की वजह से बड़े नोट लेने बंद कर दिए हैं।

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