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ट्रक प्लाटूनिंगः इतिहास, फ़ायदे और भविष्य

Published On Jul 18, 2016By लिसा प्रधान

ट्रक प्लाटूनिंग के बारे में अब तक बहुत कुछ कहा जा चुका है व ट्रकिंग की दुनिया में इसके इस्तेमाल को लेकर भी काफ़ी चर्चा होती रहती है यह इंट्रीगुइंग इंटेलीजेंट सिस्टम ट्रांसपोर्टेशन का मुखड़ा बहुत बड़े स्तर पर बदलने के साथ-साथ लॉजिस्टिक इंडस्ट्री में क्रांति लाने वाला है। यहां हम आपको ट्रक प्लाटूनिंग के उद्भव तथा आने वाले सालों में यह किस तरह से लाभकारी साबित होगा इस बारे में बता रहे हैं।

प्लाटूनिंग क्या है

ट्रक प्लाटूनिंग स्टार्ट टेक्नोलौजी तथा सशक्त कम्यूनिकेशन के साथ चलाए जाने वाले ट्रक्स का कंप्रोमाइज है। यह सड़क पर एक ऑर्गेनाइज्ड प्लाटून क्रिएट करता है। यह सेमी-ऑटोनॉमस सड़कों की चढ़ाइयों पर किस तरह से काम करता है यह भी देखने लायक होता है। इस में कई सारे सेंसस की मदद से दो या उनसे अधिक व्हीकल्स का एक साथ कंट्रोल वायरलैस कम्यूनिकेशन के तहत किया जाता है। इस वजह से एक्शन लीड ट्रक द्वारा किया जाता है जो कि प्लाटून में मौजूद अन्य ट्रक्स में तुरंत प्रभाव से कम्यूनिकेशन स्थापित करता है। उदाहरण के तौर पर लीड करने वाला ट्रक अचानक से ब्रेक लगाता है तो इस कोलाइजन अवॉइडेंस सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है तथा अन्य ट्रक्स को भी हाथो-हाथ रूकने के लिए कम्यूनिकेशन लिंक शेयर कर देता है।


इतिहास

व्हीकल्स की प्लाटूनिंग की शुरूआत 1972-73 में हुई थी इसके बाद कई सारी इंटेलीजेंट टेक्नोलॉजी आ गईं। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रैकिंग प्लाटूनिंग की शुरूआत 1939 में हुई थी जब एक इंडस्ट्रीयल डिजाइनर नार्मन बेल गेड्डेज ने पहली बार ऑटोमेटिक ट्रक का विचार प्रस्तुत किया था। अभी तक इस टेक्नोलॉजी के लिए सीधेतौर पर रेफरेंस 1972-73 के तौर पर दिया जाता है, जब फ्रेंच टेस्ट ट्रेक पर यूरोपीयन आर्मिस ने प्लाटून वाले 25 स्मॉल ट्रांसिट व्हीकल्स को 50 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया था। इन व्हीकल्स में अल्ट्रासोनिक तथा ऑप्टिकल रेंज सेंसर्स का उपयोग किया गया था।

यूरोप में (1980-1995) में प्रोमेथ्युस प्रोजेक्ट भी मील का पत्थर साबित हुआ जब कार और ट्रक मेकर्स दोनों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, यूनिवर्सिटीज तथा सरकार एडवांस्ड रोड़ सिस्टम वाले इंटेलीजेंट व्हीकल्स को बनाने के लिए साथ में आए। यह अरेंजमेंट कम्यूनिकेशंस, व्हीकल कंट्रोल तथा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में की एरियाज को शामिल करेगा।

इस प्रोजेक्ट में सीधतौर पर शामिल होने वाली कंपनियों में से प्रमुख तौर पर एक फॉक्वेगन है जिसने हाईवे स्पीड के साथ टेस्ट ट्रेक ट्रायल्स किए। यह व्हीकल पूरी तरह से ऑटोमेटेड स्टीयरिंग तथा लॉंन्गीटूडेनल कंट्रोल वाला था। हालांकि, इस प्रोजेक्ट ने बहुत कुछ कर दिखाया, लेकिन कई कारणों से इसे बंद कर दिया गया।

वर्तमान में चलने वाले प्रोजेक्ट्स

वर्तमान में बढि़या प्लाटूनिंग टेक्नोलॉजीज के लिए यूनाइटेड स्टेट्स में एक्सपरीमेंट्स लगातार हो रहे हैं। एडवांस्ड ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी (पाथ) प्रोजेक्ट के लिए यूसी बार्कले में पार्टनर्स ने 1986 में स्टेट तथा स्थानीय सरकारें और प्रमुख तरह के इंटेलीजेंट सिस्टम्स के साथ कोलोब्रेशन के तौरर पर काम शुरू किया। आज भी पाथ प्रोजेक्ट ऑपरेशनल है तथा इसके तथा 14 फीट के इंटरवेल्स के साथ तीन ट्रक प्लाटूंस चलते हैं।

ट्रक प्लाटूनिंग को प्रेक्टिकल रीयलिटी बनाने के लिए दुनिया के कई सारे देश टेस्ट प्रोग्राम्स चला रहे हैं। इन सभी प्रोजेक्ट्स में से एक जिसका वर्णन करने की जरूरत है वो सेफ रोड़ ट्रेंस फोर दी एनवायरमेंट (एसएआरटीआरई) प्रोजेक्ट (2010-2012) है। इस की शुरूआत यूरोपीयन कमिशन, रिकार्डो यूके तथा वोल्वो के बीच में पार्टनरशिप के तहत की गई थी। इस प्रोजेक्ट का फोकस ट्रक प्लाटूनिंग के लिए ऐसा इंटेलीजेंट सिस्टम डिजाइन करना का था, जो प्रमुख एनवायरमेंटल के साथ सेफ्टी बेनिफिट्स भी मुहैया कराए। पहली बार में एसएआरटीआरई ने लॉगीटूडेनल के साथ साथ लैथरल पोजीशंस में भी ऑटोमेटेड कंट्रोल दिया। इस में लैथरल पोजीशंस ने पहली बार प्लाटूनिंग टेक्नोलॉजी को काम में लिया था।

सिलिकोन वेली के आउटफिट के वोल्वो तथा पीटरबिल्ट के साथ वाले कोलोब्रेशन की पेलोटन टेक्नोलॉजीज भी ट्रक प्लाटूनिंग सिस्टम के साथ आ चुकी है, जो कोलाइन मिटिगेशन तथा एडप्टिव क्रूज कंट्रोल सिस्टम के लिए सेफ्टी, एफिशियंसी तथा एनालिटिक्स मुहैया कराती है। यह सिस्टम व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशंस (वी2वी), राडार बेस्ट एक्टिव ब्रेकिंग सिस्टम्स तथा ट्रक्स को इलेक्ट्रिीकली जोड़ने के लिए प्रोपराइट्री व्हीकल कंट्रोल एल्गोरिदम्स के साथ आता है। पेलोटन ने डेट्रॉयट में सक्सेसफुल डेमो भी दिया तथा अब अन्य रीजंस में भी डेमो रन्स देने के बारे में काम कर रही है।


प्लाटूनिंग के लाभ

ऑबर्न यूनिवर्सिटी की जीपीस एंड व्हीकल डायनामिक्स लेबोरेट्री साथ आयोजित की गई एक स्टडी की ओर से जारी किया गया है कि प्लाटून के तहत दौड़ने वाले ट्रक्स ज्यादा फ्यूल एफिशियंट के साथ ट्रक्स में 5 फीसदी अधिक तक बचत करने तथा ट्रेलिंग ट्रक में 10 फीसदी तक की फ्यूल की बचत करने वाली बनाती है। ट्रक प्लाटूनिंग के कुछ लाभ इस प्रकार हैः

1. जैसे कि ट्रक्स समान स्पीड के साथ कम ब्रेकिंग तथा एक्सेलेटिंग के साथ एक दूसरे के साथ ड्राइव करते हैं, तो प्लाटूनिंग फ्यूल कंशप्शन को कम करता है जो कि कॉस्ट बचाने वाला है। इस के अलवा एयरोडायनेमिक्स ड्रेग भी फ्यूल की बचत करता है।

2. प्लाटूनिंग कार्बन एमिशंस को भी 10 फीसदी तक कम करती है।

3. ट्रक प्लाटूनिंग सड़कों पर से्फ्टी को बढ़ाती है। कनेक्टेड ड्राइविंग के कारण जीरो रिएक्शन टाइम के साथ ब्रेकिंग ऑटोमेटिक हो जाती है तथा मानवीय गलतियों को भी कम करती है।

4. प्लाटूनिंग रोड़ कंगेशन, ट्रैफिक जाम को करते हुए, टेल बैक्स को कम करते हुए तथा सामान को तेजी से डिलीवर करने में सहायता करते हुए रोड़ ट्रांसपोर्टेशन को ऑप्टिमाइज करने में मदद करती है।

5. प्लाटूनिंग सेफ तथा भाड़े के फ्लो को अधिक एफिशियंट बनाती है।

वर्तमान और भविष्य

सभी ऑर्गेनाइजेशंस की प्लाटूनिंग टेक्नोलॉजीज वर्तमान में टेस्टिंग फेज में हैं। कुछ महिनों पहले यूरोप में प्लाटूनिंग चैलेंज का आयोजन किया गया था, जहां पर ट्रक प्लाटूंस को 6 ट्रक मेकर्स द्वारा विभिन्न रूट्स पर नीदरलैंड्स के रोटेर्डम में उतारा गया था। इस चैलेंज में पार्टिशिपेट करने वाले ब्रैंड्स में डीएएफ, इवको, मेन, स्कैनिया, वोल्वो तथा डेमलर शामिल हैं।


प्लाटूनिंग ने नेटिजेंस तथा सभी तरह की संभावनाओं पर आंखे गढ़ाए हुए हैं तथा इन ऑनलाइन चर्चा की जा चुकी है। गुजरते हुए प्रत्येक साल के साथ प्लाटूनिंग टेक्नोलॉजीज को एडवांस करने के तथा नॉलेज की अच्छी शेयरिंग और इस इंटेलिजेंट सिस्टम एक्सपीरियंस, प्लाटूनिंग हाईवे वाली सड़कों पर एक सामान्य फेनोमेन हो सकता है।

हालांकि, भारत में प्लाटूनिंग के आने के लिए सभी ट्रकिंग इंडस्ट्री के स्टेक हॉल्डर्स जैसे कि ट्रक मेकर्स, लॉजिस्टि सर्विसेज, रिसर्च इंस्टीट्यूट तथा सरकारी उपक्रमों की ओर से यहां जोर शोर तथा म्युच्युअल पार्टिशिपेशन की जरूरत है। हालांकि, बाहरी देश सड़कों पर ऑपरेशंस के लिए प्लाटूनिंग को शुरू करने जा रहे हैं।

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