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ओवर लोडिंग पर सख़्त नियमों से बढ़ेगी एम&एचसीवी सेल्स

Published On Nov 30, 2016By लिसा प्रधान

जहाँ एक तरफ़ सारा देश नोट बंदी के प्रभावों से जूझ रहा है वहीं दूसरी ओर, कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री फिलहाल उछाल पर है। त्योहरी सीज़न और भारत स्टेज 4 (बी एस 4) नियम लागू होने से पूर्व की प्री-बाइयिंग (पहले से खरीद) के चलते सेल्स ग्रोथ में बढ़ोतरी चल ही रही है, इस के अलावा ओवर लोडिंग पर सख्ती के नियमों के लागू होने से भी निश्चित रूप से सेल्स में इज़ाफ़ा होगा।

ओवर लोडेड ट्रक्स, जो की भारतीयों सड़कों पर अक्सर देखे जाते हैं, फिलहाल जाँच के दायरे में चल रहे हैं। सरकार ओवर लोडिंग को काबू में करने के लिए सख़्त कदम उठा रही है और 21 दिसंबर 2015 के नोटिफिकेशन के अनुसार टोल टेक्स बूथ्स को ट्रक्स में ओवर लोडिंग पर नज़र रखने को कहा गया है, और साथ ही अन्य ओवर लोडिंग व्हीक्ल्स को भी अनुमेय सीमा के अनुसार लोड ले जाने के लिए कहा गया है। यदि लोड अनुमेय सीमा से ज़्यादा पाया जाता है तो व्हीकल को नामित पार्किंग स्पॉट पर टोव करके ले जाया जाएगा। अतिरिक्त लोड को हटाने के अलावा, ऑपरेटर्स को भारी जुर्माना भी अदा करना होगा व टोयिंग और पार्किंग का चार्ज भी वहन करना होगा।

इस तरह के कठोर अधिनियमों के चलते, ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री अब धीरे धीरे 25 टन ट्रक्स से 37 टन और 49 टन के हॉलेज ट्रक्स की ओर शिफ्ट हो रही है। इकॉनोमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 25 टन ट्रक्स की डिमांड इस वित्तीय वर्ष में आधी रह गयी है, साथ ही हेवी ड्यूटी टिपपर्स की सेल्स में 32 प्रतिशत और ट्रॅक्टर ट्रेलर्स की सेल्स में 6 प्रतिशत की इज़ाफ़ा देखने को मिला है।

ओवर लोडेड ट्रक्स पर दबाव साल 2005 से शुरू हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सड़कों पर ओवर लोड ट्रक्स को बेन करने का मुद्दा उठाया था। देश की सड़क पर किसी भी ओवर लोड व्हीकल को रोका जा सकता है उस के अतिरिक्त लोड को ज़ब्त करके उस के ट्रांसपोर्टेर पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा गया था।

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों को उनकी क्षमता के अनुसार लोड का भार संभालने के लिए अलग अलग तरीके से तैयार किया जाता है, और यहाँ निर्धारित लोड केपॅसिटी से 10 प्रतिशत भी ज़्यादा लोड ट्रक में रहा तो उसका असर ट्रक के जीवनकाल को 35 प्रतिशत का कम कर देता है।

इस से भारतीय सड़ेकों की सेहत भी सही ढंग से बनी रहती है व साथ ही ज़्यादा टन की क्षमता वाले ट्रक्स और ट्रेलर्स भीड़ को भी कम करते हैं, प्रदूषण की रोक थाम होती है और साथ ही इस से एक्सीडेंट्स के चान्सस भी कम हो जाते हैं।

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