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ट्रक मार्केट के रिवाइवल के लिए बढ़ती इनफ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटी ज़िम्मेदार

Published On Feb 17, 2016By प्रशांत तलरेजा

ट्रक मार्केट में आए अचानक उछाल की वजह बढ़ते प्रदूषण पर रोक लगाने वाले क़ानूनों को समझा जा रहा था, जिस के कारण नये ट्रक्स की सेल्स में वृद्धि देखने को मिली। लेकिन, अब सामने आया है की यह केवल एक फॅक्टर था, जो की भारत में ट्रक सेल्स को हवा दे रहा था। दूसरा मूल कारण रहा पिछले कुछ महीने से बढ़ती इनफ्रास्ट्रक्चर और कन्स्ट्रक्षन गतिविधियाँ। पिछले साल सितंबर तक बढ़ती सेल्स का रुझान केवल कार्गो व्हीक्ल्स के सेगमेंट में ही देखने को मिला था, लेकिन हाल में टिप्पर और कन्स्ट्रक्षन व्हीक्ल्स की सेल्स में भी वृद्धि देखने को मिल रही है, जो की कन्स्ट्रक्षन सेक्टर में नई तेज़ी की तरफ इशारा है।

वोल्वो आईशर कमर्शियल व्हीक्ल्स के सीईओ, श्री विनोद अग्रवाल का मानना है की हॉलेज ट्रक्स की बढ़ती सेल्स ने मीडियम और हेवी व्हीक्ल्स के सेगमेंट को रिवाइव करने में मदद की है। "यह कॉंपोनेंट अब बदल रहा है क्योंकि इनफ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटी अब तेज़ी पकड़ रही है और प्री-बाइन्ग और रिप्लेस्मेंट्स भी साथ साथ चल रहे हैं," उन्होंने जानकारी दी। महिंद्रा ट्रक्स एंड बसेस के मॅनेजिंग डाइरेक्टर श्री नलिन मेहता बेहद आशावादी लगे इंडस्ट्री के मौजूदा मौसम को लेकर और कहा की चीज़ें "स्पष्ट रूप से ज़्यादा पॉज़िटिव हैं ट्रकिंग कम्यूनिटी के लिए।" उन का मानना है की, ट्रकिंग इंडस्ट्री में एक बड़ी डिमांड का हिस्सा पुराने व्हीक्ल्स के रीप्लेस्मेंट्स की वजह से आ रहा है।

फिर भी, मार्केट में अचानक आए सकारात्मक रवैये के बावजूद, कुछ एनालिस्ट्स इस माहौल को ज़्यादा सूझ बूझ के साथ देख रहे हैं। टाटा मोटर्स के श्री रविन्द्र पिशरोडी आगाह करते हुए कहते हैं की अचानक ग्रोथ के बाद आने वाला साल यानी 2017-18 उतना उत्तेजित करने वाला नहीं होगा, क्योंकि तब नये बीएस4 (भारत स्टेज 4) नॉर्म्स मार्केट में खटास का मुख्य कारण बन कर उभरेंगे। वह कहते हैं की, "शुरुआत का पहला आधा साल धीमा रहेगा, लेकिन यहाँ देश की इकॉनोमी अहम रोल निभाएगी।"

बॅंकिंग सेक्टर की ओर से अशांति भी ट्रकिंग मार्केट में अपना असर दिखा रही है। इस के अतिरिक्त, ग्लोबल मार्केट में बढ़ती अस्थिरता भी दूसरे रिसेशन की ओर कुछ चिंताभरे संकेत दे रही है। इंडस्ट्री के अन्य एक्सपर्ट्स इस बात पर चिंता जाता रहे हैं की हॉलेज ट्रक्स की डिमांड मौजूदा स्थिति से मेल नहीं खा रही है। हॉलेज ट्रक्स का अतिरिक्त प्रोडक्षन कइयों के लिए एक असमंजस की स्थिति पैदा कर सकता है, ऐसे वक़्त में जहाँ सीमेंट और स्टील की मूल इंडस्ट्रीज़ को अभी रिकवर करना बाक़ी हैं, और साथ ही एग्रीकल्चरअल प्रोडक्षन अभी तक अपने पर्याप्त पैमाने तक नहीं पहुँचा है।

महिंद्रा से श्री मेहता कुछ हद तक आशावादी रवैया दिखाते हैं, लेकिन कई मॅन्यूफॅक्चरर्स द्वारा इस नये वातावरण में अपनाई गयी आक्रामक रणनीतियों को लेकर चिंतित हैं, जिस में की बढ़ते डिसकाउंट्स भी शामिल हैं।

देश में ट्रक डिमांड में गिरावट के रिस्क को रोकने के लिए, कुछ इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स मोटर साइकल्स और कार्स को केरी करनेवाले लंबे ट्रक्स की लंबाई को कम करने का सुझाव दे रहे हैं। "जैसे ही इनकी लंबाई पर शिकंजा कसा जाएगा, ज़्यादा ट्रक्स का इस्तेमाल अपने आप शुरू हो जाएगा," यह कहना था अशोक लीलेंड से श्री राजीव साहरिया का।

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