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ॉन डीर तथा आईशर ने भारत में ट्रेक्टर परफॉर्मेंस और क्वालिटी में सबसे उँची रेंकिंग प्राप्त की

Published On Feb 23, 2016By लिसा प्रधान

ट्रेक्टर्स की परफॉर्मेंस और क्वालिटी के मामले में कल जारी की गई स्टडी के रिजल्ट्स में यह सामने आया है कि भारत के सभी ट्रक ऑनर्स के सभी फोर हॉर्स पावर (एचपी) सेगमेंट्स में सेटिफेक्शन में कमी आई है। भारत के इस कमजोर होते हुए मार्केट में यह इस बात का इशारा भी है कि इस सेगमेंट में लोग लंबे समय तक चलने वाले वाहनों की अपेक्षाएं रखते हैं। इस स्टडी के अनुसार ट्रैक्टर ऑनर्स ने अपना ज्यादा से ज्यादा सेटिफेक्शन जॉन डीर तथा आईशर व्हीकल्स के प्रति बताया।

जेडी पावर 2016 इंडिया ट्रैक्टर प्रोडक्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (पीपीआई) स्टडी व्हीकल्स की परफॉर्मेंस तथा सेटिफेक्शन के मामले में दो सूचियां आगे है। इनमें मशीन परफॉर्मेंस, क्वालिटी तथा रिलायबिलिटी शामिल है। इन मशीनों की परफॉर्मेंस ट्रैक्टर ऑनर्स के सात तरह के मूल्यांकन के आधार पर की गई है। इनमें हाइड्रायूलिक तथा कॅपलिंग, ड्राइवबिलिटी, इंजन तथा ट्रांसमिशन, ऑवर ऑल स्टाइलिंग तथा डिजाइन, ड्राइविंग कंफर्ट, ट्रैक्टर स्ट्रक्चर तथा टायर शामिल हैं। यह क्वालिटी और रिलायबिलिटी इंडेक्स ऑनर्स के एक्सपीरियंस तथा क्वालिटी इशूज (कथित तथा निबाही गई) की रेटिंग के आधार का विश्लेषण दर्शाता है।

इस स्टडी ने ट्रैक्टर्स को चार सेगमेंट में बांटते हुए अपनी रेंक दी है। इनमें 31 हॉर्सपावर से कम, 31 हॉर्सपावर से 40 हॉर्सपावर, 41 हॉर्सपावर से 50 हॉर्सपावर तथा 50 हॉर्सपावर से ज्यादा हॉर्सपावर के ट्रैक्टर शामिल थे। अपने दमदार और हेवी ड्यूटी व्हीकल्स के लिए मशहूर आईशर ऑटो मेकर इन भी सातों मशीन की परफॉर्मेंस केटेगरी में अव्वल रहा, तथा 31 एचपी सेगमेंट में 787 प्वॉइंट्स के साथ सबसे आगे रहा। हालांकि, अन्य सभी एचपी केटेगरीज में जॉन डेरे सबसे आगे रहा। इन में 31 एचपी से 40 एचपी (794 प्वॉइंट्स), 41 से 50 एचपी सेगमेंट (807 प्वॉइंट्स) तथा 50 एचपी से ज्यादा के सेगमेंट (821 प्वॉइंट्स) शामिल हैं।

अगर इंडस्ट्री लेवल पर ट्रैक्टस ऑनर्स की अपने प्रोडक्ट्स के बारे में सेटिसफेक्शन की पिछले साल के प्वॉइंटस से साल 2016 में 1000 प्वॉइंट्स रखकर तुलना की जाए तो यह 771 के साथ 39 प्वॉइंट्स गिरी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सेटिस्फेक्शन लेवल पर दोनों इंडेक्स गिरे हैं।

जेडी पावर के डायरेक्टर डॉक्टर श्री गॉर्डन शील्ड्स ने इस संबंध में बोलते हुए कहा कि, “भारती में एग्रीकल्चर मार्केट को मोहकता वाला वाले विचार में लाना कमजोर इशारे के रूप में रहा। क्योंकि कस्टमर्स की अपेक्षाएं अपने ट्रैक्टर्स परफॉर्मेंस तथा क्वालिटी के प्रति बहुत तेज थी। पैदावार के आधार अपनी बड़ी आर्थिक समस्याओं को देखते हुए किसान अब लंबे समय तक चलने वाले (औसत 10 साल) ट्रैक्टर्स लेने के बारे में विचार कर रही है तथा जहां तक उनकी इनकम नहीं बढ़ जाती तब तक नया ट्रैक्टर खरीदने की बात को टाल रहे हैं।”

ट्रैक्टर उपयोग तथा इकॉनोमिक्स ऑपरेटिंग तेजी से आने वाली समस्याएं हैं। इनमें से मुख्य इशू महंगे तथा असमतल टायर लगाना, बल्ब फेल होना, गियर शिफ्ट को लगाने में परेशानी, ब्रेक लगाने पर आवाज आना तथा महंगे इंधन की ज्यादा खपत करना शामिल है।

इन सभी पहलुओं पर विस्तार पर बताते हुए जेडी पावर के मैनेजर युक्ति अरोड़ा ने कहा कि “इस साल पेट्रोलियम में विशेषतौर पर वृद्धि आई है। खेतों में कमाई कम होने के चलते ऑनर्स अपनी मशीनों की परफॉर्मेंस तथा क्वालिटी के प्रति ज्यादा जागरूक हो चुके हैं और डिफेक्ट के प्रति ज्यादा अनुदार हो चुके हैं।”

डॉक्टर शील्ड्स ने सक्षम सॉल्युशन का सुझाव देते हुए कहा कि ट्रैक्टर मॅन्युफॅक्चरर्स को अपने अफॉटर्स को ग्राहकों की मूलभूल परफॉर्मेंस तथा क्वालिटी पहलुओं की बढ़ती आशाओं के अनुसार बढ़ाना होगा। यह ब्रैंड की स्थिति तथा संपूर्ण अनुभव को बढ़ाने में मददगार होगा।

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