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भारत में केश फ्लो सुधरा, ट्रक रेंटल्स में आई बेहतरी

Published On Jan 05, 2017By Mukul Yudhveer Singh

नवंबर 2016 में हुई नोट बंदी से ट्रक रेंटल्स में भारी गिरावट देखने को मिली थी, परंतु पिछले महीने से इस में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। दी इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रैनिंग (आईएफटीआरटी) ने अपने जारी किए गये एक वक्तव्य में कहा है की ट्रक रेंटल्स में आए सुधार की बड़ी वजह देश में केश फ्लो (नकदी प्रवाह) में आई बेहतरी रही है। इस के अतिरिक्त, कार्गो अवेलबिलिटी में सुधार और नॅशनल हाइवेज़ पर टोल टेक्स का दोबारा आरंभ होना भी शामिल हैं।

फाउंडेशन ने अपने जारी किए गये स्टेट्मेंट में आगे कहा है की, "टोल में चल रही छूट 2 दिसंबर 2016 से बंद कर दी गयी है, और डीज़ल कीमतों में 1.79 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ साथ कार्गो में 10-15 प्रतिशत की सुधार के चलते ट्रक रेंटल्स ने दिसंबर 2016 में 18 प्रतिशत से 20 प्रतिशत की रिकवरी की है, जहाँ पिछले महीने 25 प्रतिशत से 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी थी।"

देखा जाए तो देश में सरकार द्वारा 500 रुपये और 1000 रुपये के बड़े नोटों की बंदी के कारण ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री का एक तरह से चक्का जाम हो गया था। चाहे वह ट्रांसपोर्टेर्स हों, फ्लीट ओनर्स हों, यहाँ तक की व्यक्तिगत ट्रक ओनर्स भी, सब मिल कर एक सुर में कम नकदी उपलब्ध होने की शिकायत करते नज़र आए।

कई सारे फ्लीट ओनर्स ने नोट बंदी के दौर में हुए अपने अपने कठिन और दुखद अनुभवों को साझा भी किया। नोयडा स्थित फ्लीट ओनर, सचिन मान ने पहले अपनी पीड़ा ट्रक्स देखो की टीम के साथ साझा करते हुए बताया था की उन के पास फ्लीट में करीब 40 ट्रक्स हैं, और हर एक को चलाने के लिए औसतन रोज़ाना 20000 रुपये की ज़रूरत होती है। परंतु उन की फ़िक्र और ज़्यादा तब बढ़ गयी जब सरकार द्वारा रोज़ाना की नकद आहरण सीमा (केश विथड्राल लिमिट) 2000 रुपये तय कर दी गयी। यह राशि इतनी ज़्यादा कम थी की, फ्लीट के सभी ट्रक्स चलाना तो दूर इस से एक ट्रक का चलना भी मुश्किल था।

कुछ इसी तरह के ही विचार देश भर के बहुत से ट्रक फ्लीट ओनर्स के रहे। वह ऐसे लोगों को ढूँढ नहीं पा रहे थे जो रोज़ाना उन का ट्रक किराए पर ले सके। लेकिन फिर भी, फिलहाल यह एक अच्छी खबर है की देश में ट्रक रेंटल्स में सुधार आ रहा है, जो की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक निशानी है।

ट्रक रेंटल्स में आई बेहतरी इस बात का साफ संकेत है की देश में केश फ्लो अब पहले से बेहतर हो चुका है और धीरे धीरे अपनी सामान्य स्थिति में आ रहा है। और जैसे ही केश की समस्या पूरी तरह से सुलझ जाती है, जिस की आने वाले कुछ हफ्तों में पूरी उम्मीद है, तो देश का लड़खड़ाता ट्रांसपोर्ट बिज़नेस भी अपनी पटरी पर दोबारा लौट आएगा। साथ ही, जैसे ही लोगों के हाथ में पैसा आने लगेगा, नकद लेनदेन बढ़ने लगेगा, और उसी के साथ ही ट्रक सेल्स में उछाल आना स्वाभाविक होगा।

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