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यदि देश ईंधन सेल तकनीक पर ध्यान केंद्रित करता है तो ह्यूनडाय CVव्यवसाय में प्रवेश करेगा

Published On Aug 26, 2019By ट्रक्सदेखो संपादकीय टीम

आदरणीय कार निर्माता, हुंडई, कॉमर्शियल वाहनों के ब्रांड में प्रवेश करने के लिए तैयार है अगर भारत हाइड्रोजन-संचालित सीवीएस पर ध्यान केंद्रित करना पसंद करता है। मीडिया से बात करते हुए, ह्यूनडाय मोटर इंडिया के अध्यक्ष, सीईओ और प्रबंध निदेशक, SS Kim ने टिप्पणी की कि डीजल पर ध्यान देना व्यापार के मामले में CVसेगमेंट को अधिक आकर्षक नहीं बनाता है। उन्होंने यह भी कहा, "भले ही ह्यूनडाय के पास CVडिवीजन है, मुझे नहीं लगता कि हम मौजूदा बाजार की स्थितियों में भारतीय CVबाजार का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन अगर पावरट्रेन नाकाम रहता है  हैं, तो इलेक्ट्रिफिकेशन या ईंधन सेल तकनिकी में बदलाव ला कर, ह्यूनडाय इसका एक हिस्सा हो सकता है। कई यूरोपीय देश बड़े CVसेगमेंट के लिए ईंधन सेल समाधान के बारे में सोच रहे हैं। "

कंपनी की  कॉमर्शियल वाहन के विभाग में मारुति सुजुकी के साथ प्रतोयोगिता होगी। मारुति ने पहले ही अपना पहला कॉमर्शियल वाहन,लॉन्च किया है सुपर कैरी 2016 में, जो एक मिनी ट्रक है जिसकी क्षमता 740 किलोग्राम है। इस सेक्शन में अन्य फ्रंट रनर टाटा मोटर्स, अशोक लीलैंड, महिंद्रा एंड महिंद्रा और पिआजियो जैसी प्रतिष्ठित कंपनियां हैं ।

ह्यूनडाय  ने पहले ही कोना इलेक्ट्रिक एसयूवी लॉन्च के दौरान ईंधन सेल से चलने वाली कार ह्यूनडाय नेक्सो लॉन्च कर दी है, किम ने कहा कि वे 2021 तक भारत में वाहन लॉन्च करेंगे और दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के आसपास आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण करेंगे। फाइव डोर फाइव -सीटर एसयूवी,120 लीटर मोटर (163 PS पावर) के साथ 163 लीटर हाइड्रोजन ईंधन टैंक के साथ आता है। इस कार की ड्राइविंग सीमा 800 किमी है, जो कि पेट्रोल से चलने वाली कारों की तुलना में कंपनी के अनुसार 1000 किमी तक बढ़ सकती है,जिसकी सीमा कहीं-कहीं 500-600 किमी है।

फ्यूल-सेल तकनीक को दुनिया भर में हाइलाइट किया गया है क्योंकि यह विस्तारित ड्राइविंग सीमा प्रदान करता है। सरकार ने पहले से ही GSTदर को 28 से 12 प्रतिशत तक घटाकर तकनिकी को बढ़ावा देने में रुचि दिखाई है, हालांकि किसी अन्य कंपनी ने तकनिकी  के प्रति रुचि नहीं दिखाई है, चाहे वह कार हो या सीवी। जापानी कार निर्माता टोयोटा, हालांकि ईंधन-सेल तकनिकी पर रुचि दिखा रही है,मुख्य रूप से सस्ती हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक तकनिकी पर ध्यान केंद्रित कर रही है,जबकि टाटा मोटर्स ने ईंधन-सेल-संचालित बसों का प्रदर्शन किया है।

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