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दिसंबर में फिर गिरी कमर्शियल व्हीक्ल्स सेल्स: नोट बंदी ज़िम्मेदार

Published On Jan 03, 2017By Mukul Yudhveer Singh

हो सकता है साल 2016 बहुत से लोगों के लिए अच्छा साबित हुआ हो, लेकिन भारत में मौजूद बस और ट्रक मॅन्यूफॅक्चरर्स कें लिए तो यह निश्चित रूप किसी कड़वी घूँट से कम नहीं रहा। एक के बाद एक आए आश्चर्य से भरे परिणामों ने देश की ट्रकिंग कम्यूनिटी को सुकून की साँस लेने का मौका नहीं दिया। हालाँकि, साल भर में, ऐसे बहुत से अलग अलग रुझान, घटनाएँ और डेवेलप्मेंट्स सामने आए जिन्होंने कमर्शियल व्हीक्ल्स की सेल्स को जकड़े रखा, लेकिन फिर भी जिस समस्या ने कमर्शियल व्हीक्ल्स की सेल्स में सबसे ज़्यादा सेंध लगाई वह 500 रुपये और 1000 रुपये के बड़े नोटों की बंदी रही।

नोट बंदी का प्रभाव उस की घोषणा के अगले ही हफ्ते दिखाई देने लग गया था। देश के कमर्शियल व्हीकल सेक्टर में बसेस और ट्रक्स की सेल्स 2016 के नवंबर महीने में बुरी तरह दम तोड़ती दिखाई दीं। नवंबर की हताशा के बाद सभी ब्रांड्स दिसंबर 2016 से कुछ उम्मीदें लगाए बैठे थे, परंतु दिसंबर महीने में भी कमर्शियल व्हीकल मॅन्यूफॅक्चरर्स को कुछ खास सफलता हाथ नहीं लगी। जहाँ एक तरफ कुछ ने अपने सेल्स आँकड़ों को मज़बूती से पकड़ कर रखा वहीं दूसरी ओर अन्य ब्रांड्स 500 रुपये और 1000 रुपये के नोट की बंदी की मार से अपने आप को नहीं बचा सके। पेश है दिसंबर 2016 की सेल्स परफॉर्मेंस का ब्रांड वार विश्लेषण।


महिंद्रा एंड महिंद्रा

महिंद्रा के लिए बोलरो पिक अप एक बार फिर मुस्कुराने का मौका लेकर आया, और इस बार उस ने कंपनी को नोट बंदी के असर से निपटने की शक्ति प्रदान करते हुए काफ़ी हद तक, कम से कम आँकड़ों के मामले में तो डूबने से बचा लिया। देश के अग्रीण कमर्शियल व्हीकल ब्रांड ने दिसंबर 2016 में कुल 14154 कमर्शियल बसेस, ट्रक्स और पिक अप्स की सेल्स की, जो की दिसंबर 2015 के मुक़ाबले 1689 यूनिट्स ज़्यादा है। इस तरह महिंद्रा ने गत साल दिसंबर में कुल 12465 कमर्शियल व्हीक्ल्स की सेल्स की थी। इन सभी सेल्स आँकड़ों में मिनी ट्रक्स और पिक अप्स ने मुख्य रोल अदा किया।

महिंद्रा की दिसंबर की कमर्शियल व्हीक्ल्स सेल्स में पिक अप्स के बड़े योगदान होने की वजह से कंपनी अन्य ब्रांड्स को इस सेगमेंट में पछाड़ती नज़र आई। मिनी ट्रक्स और पिक अप्स केटेगरी में अच्छा करने पर महिंद्रा बधाई की पत्र है, परंतु जब बात आती है देश के मीडियम और हेवी कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट के प्रमुख प्लेयर्स की तो वह उन के आस पास भी दिखाई नहीं देता।

टाटा मोटर्स

हालाँकि, कमर्शियल व्हीकल सेक्टर के दिग्गज माने जाने वाले टाटा मोटर्स ने भले ही इंडियन डिफेन्स फोर्सस से इस साल 400 करोड़ रुपये के बराबर मूल्य का ऑर्डर अपने नाम कर लिया हो, लेकिन फिर भी वह कन्ज़्यूमर लेवल पर अपनी साख बचाने में नाकाम दिखाई दिया है। टाटा मोटर्स ने दिसंबर 2016 में 24998 यूनिट्स की सेल्स की, जो की 2349 बसेस और ट्रक्स कम रहे पिछले साल के मुक़ाबले इसी समय के दौरान। गत साल कंपनी ने 27347 कमर्शियल व्हीकल यूनिट्स की सेल्स रिकॉर्ड की थी।

इन आँकड़ों से कुछ हद तक यह बात सामने आती है की कमर्शियल व्हीकल चॅंपियन प्रतिस्पर्धा इस कठिन दौर में अपनी साख थोड़ी बहुत खोता दिखाई दे रहा है। इसलिए, अपने आप को मार्केट और कन्ज़्यूमर के सामने बेहतर ढंग से पेश करने के लिए टाटा मोटर्स ने बोलीवुड के मशहूर खिलाड़ी कुमार को अपना ब्रांड अंबॅसडर नियुक्त किया है। हम उम्मीद करते हैं की अक्षय कुमार कंपनी व उस की प्रॉडक्ट लाइन के लिए अच्छा सौभाग्य लेकर आए।

वीईसीवी

वोल्वो आयशर कमर्शियल व्हीक्ल्स (वीईसीवी), जो की दो कमर्शियल व्हीकल दिग्गजों (आयशर और वोल्वो) को सम्मिलित कर के बना गया समूह है, वह भी दिसंबर 2016 में नोट बंदी के असर से बचने में नाकाम रहा। वीईसीवी ने गत माह में 3246 यूनिट्स ट्रक्स और बसेस की सेल्स की, जो की 863 यूनिट्स कम है, पिछले साल के विपरीत इसी समय के दौरान, जहाँ कंपनी ने 4109 यूनिट्स लो सेल्स अर्जित की थी।

इस के अलावा, दिसंबर 2016 में एक्सपोर्ट होने वाले ट्रक्स और बसेस के संख्या में आई कमी ने भी कमर्शियल व्हीकल मेकर को दुविधा में डाल दिया है।

अशोक लीलेंड

नवंबर महीने में अशोक लीलेंड ही केवल एक ऐसा अकेला कमर्शियल व्हीकल मॅन्युफॅक्चरर था जो ग्रोथ की सीढ़ियाँ चड़ता दिखाई दिया था। लेकिन इस बार नोट बंदी के आगे, सभी अन्य कमर्शियल व्हीकल मेकर्स की तरह, वह भी घुटने टेकता दिखाई दिया।

देश के इस बस और ट्रक मॅन्युफॅक्चरर ने दिसंबर 2016 में केवल 10731 कमर्शियल व्हीकल यूनिट्स की सेल्स अर्जित की। जब की इस ने दिसंबर 2015 में इस ने 4109 यूनिट्स की सेल्स की थी। 2016 दिसंबर की सेल्स में 1423 बसेस और ट्रक्स की सेल्स कम रही गत साल के विपरीत इसी समय के दौरान।

निष्कर्ष

आगे आने वाले कुछ हफ्तों में भी कमर्शियल व्हीक्ल्स की सेल्स में इज़ाफ़ा होने के कोई खास इमकान नहीं हैं। लेकिन हो सकता है की जनवरी 2017 का तीसरा हफ़्ता देश के कमर्शियल व्हीकल मॅन्यूफॅक्चरर्स को कुछ सकारात्मक संकेत देने में कामयाब रहे। इस समय ट्रकर्स और ट्रांसपोर्टेर्स देश में केश फ्लो के सामान्य होने का इंतेज़ार कर रहे हैं क्योंकि 1 अप्रैल 2017 से बीएस 4 (भारत स्टेज 4) और अनिवार्य एयर कंडीशनर्स के नॉर्म्स लागू हो जाएँगे। और जैसे ही यह अमल में आता है, ट्रक्स की कीमतें में इज़ाफ़ा निश्चित रूप से देखने को मिलेगा।

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