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शुरुआत करने वालों के लिए गाइड 4: ट्रकिंग इंडस्ट्री का नियंत्रण करने वाली रेग्युलेटरी बॉडिज़

Published On Sep 22, 2016By लिसा प्रधान

देश के दूरदराज़ क्षेत्रों व अंदरूनी भागों में भारी मात्रा में सामान ट्रांसपोर्ट करते-करते, ट्रक्स लाखों लोगों की भारत में लाइफलाइन (जीवन रेखा) बन गये हैं। यदि पूरे देश के रोड नेटवर्क के आँकड़े को देखा जाए जिस में राष्ट्रीय हाइवेज़, राज्य हाइवेज़, ज़िलों, गावों व अन्य रोड्स शामिल कर लिए जाएँ तो इसकी कुल संख्या 4258546 किलो मीटर है। इस के अतिरिक्त, रोड्स पर सामान ढोने वाले कुल व्हीक्ल्स की संख्या, साल 2013 के आँकड़ों के हिसाब से, करीब 8.1 मिलियन है। जिस से यह बात समझ में आती है की कई सारी रेग्युलेटरी संस्थाएँ मौजूद हैं जो की ट्रकिंग इंडस्ट्री की मदद करती हैं उसकी रफ़्तार कायम रखने में।

शुरुआत करने वालों के लिए गाइड के चौथे भाग में दी गयी डीटेल्स के मध्यम से आप जान पाएँगे की किस तरह यह नियंत्रक बॉडीज़ अनुशासन कायम रखते हुए इंडस्ट्री को एक साथ लाती है।

रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफीस

रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफीस (आर टी ओ) एक बेसिक बॉडी है जो की हर एक राज्य में ट्रांसपोर्ट कमिशनर के नीचे कार्यरत होती है। आरटीओ का काम सिर्फ़ ड्राइवर्स और व्हीक्ल्स को लाइसेन्स देने तक ही सीमित नहीं है बल्कि, वह एक गेट कीपर (द्वार रक्षक) की तरह ज़्यादा काम करता है जिस में सड़कों पर चल रहे व्हीक्ल्स की क्वालिटी को चेक करना उसका काम है। फिलहाल, कई सारे आरटीओ को डिजिटाइज़्ड किया जा रहा है और सरकार एक सिंगल डेटाबेस बनाना चाहती है जिस में देश भर के सभी लाइसेन्स धारकों एक साथ जोड़ा जा सके।

टेक्स एड्मिनिस्ट्रेटर्स

कई बार लंबी दूरी की यात्राओं को तेय करने के लिए ट्रकर्स को कभी कभी विभिन्न राज्यों को पार करना पड़ता है जहाँ उनको इंटर स्टेट लेवल पर टेक्स में वेरीयेशन्स का सामना करना पड़ता है। इसलिए, चेकपोस्टों पर उनके लिए टेक्स एड्मिनिस्ट्रेटर्स द्वारा निरीक्षणों के प्रावधान रखे जाते हैं।

इस के अलावा, कहा जा रहा है की हाल ही में प्रस्तावित जीएसटी (गूड्स एंड सर्विस टॅक्स) बिल के लागू होने के बाद टेक्सेशन तर्कयुक्त होगा और टेक्स चेक पॉइंटस को भी समाप्त करने में मदद करेगा।

ट्रेफिक पोलीस

ट्रेफिक पोलीसकर्मियों को विभिन्न महत्त्वपूर्ण सिग्नल्स पर तैनात किया जाता है ताकि ट्रेफिक के निज़ाम को ठीक से चलाया जा सके और एक्सीडेंट्स को भी होने से रोका जा सके। लेकिन फिर भी, देश में ट्रेफिक अनुशासन की कमी की वजह से, ट्रकर्स अक्सर रोड और सामान ढोने की क्षमता के नियमों का उलंघन करेट दिखाई देते हैं, जिस के कारण उनपर ट्रेफिक पोलीसकर्मियों द्वारा भारी जुर्माना लगाया जाता है।

रोड डेवेलपमेंट औथोरिटीज़

विभिन्न औथोरिटीज़ भारत के रोड नेटवर्क को नियंत्रित और मेनटेन करती हैं जैसे की नॅशनल हाइवे औथोरिटी ऑफ इंडिया (एन एच आई ए), पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (पी डब्ल्यू डी) और स्थानीय संस्थाएँ। रोड नेटवर्क्स का कन्स्ट्रक्षन, ऑपरेशन, मेंटेनेंस कई औथोरिटीज़ पर इन्स्टिट्यूशनल स्ट्रक्चर के आधार पर निर्भर करता है।

सेंट्रल एंड स्टेट बॉडीज़

जब बात आती है नई रोड पॉलिसीस को लागू करने की या बनाने के तो यह संस्थान एक बहुत बड़ा रोल अदा करता है मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज़ के अंतर्गत। साथ ही, राज्य स्तर पर पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और ट्रांसपोर्ट कमिशनर्स ट्रकिंग इंडस्ट्री को सुचारू रूप से चलाने के लिए नई पॉलिसीज़ बनाने व लागू करने में मदद करते हैं।

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