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शुरुआत करने वालों के लिए गाइड 3: ट्रकिंग इंडस्ट्री की सहायक सर्वीसज़

Published On Aug 19, 2016By लिसा प्रधान

शुरुआत करने वालों के लिए पहली और दूसरी गाइड में देश के मुख्य ट्रांसपोर्टेशन संसाधनों और ट्रकिंग इंडस्ट्री के मूल तत्वों के बारे में जानकारी हमने आप से साझा की। और अब हम आप के सामने इस विश्य का तीसरा भाग लेकर आए हैं जिसमें हम आपको ट्रकिंग इंडस्ट्री की उन सपोर्ट (सहायक) सर्वीसज़ के बारे में बताएँगे जो इसको हमेशा सक्रिय रखती है।

हम इस पर पहले ही चर्चा कर चुके हैं की गूड्स (समान ढोने वाले) व्हीक्ल्स की हमारे देश में बहुत बड़ी संख्या मौजूद है, मार्च 2013 की स्टडी के हिसाब से 8.1 मिलियनv यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है की इतनी बड़ी संख्या में व कभी कभी विपरीत हालात में, इन व्हीक्ल्स को हमेशा चलाने वाली यह कौन सी शक्ति है। दरअसल, यह ताक़त है सपोर्ट सर्वीसज़ की। इसलिए, इंडस्ट्री के बड़े खिलाड़ियों जैसे की मॅन्यूफॅक्चरर्स, फ्लीट ओनर्स, ब्रोकर्स और बॉडी मेकर्स के अलावा एक है ट्रकिंग इकोसिस्टम जिस में अनगिनत सर्वीसज़ शामिल हैं, और जो एक अहम भूमिका निभाता है हमारी कार्गो और ट्रांसपोर्टेशन इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में।

मेंटेनेंस और रिपेयर

शुरुआती दिनों में तो मेंटेनेंस और रिपेयर सेक्टर बिलकुल अनऑर्गनाइज़्ड था, लेकिन अब मॅन्यूफॅक्चरिंग कंपनीज़ अपने नये व्हीक्ल्स पर कुछ सालों के लिए एनुअल मेंटेनेस चार्जस (एएमसी) मुहैय्या करा रही हैं। इस के बावजूद अभी भी सड़कों पर 34 प्रतिशत ऐसे ट्रक्स दौड़ रहे हैं जो की 10 साल से ज़्यादा पुराने हैं, और वह अक्सर आपातकालीन स्थितियों में रोडसाइड रिपेयर पर ही निर्भर करते हैं, और अपने फ्लीट ओनर्स से इसका मेंटेनेस वसूल करते हैं।

खाना और रहना

युनाइटेड स्टेट्स (यू एस) सहित कई देशों में ट्रक्स स्टॉप्स पर लंबे हॉलेज ट्रक्स के प्रोफेशनल ड्राइवर्स को सेवा प्रदान करना एक आम दृश्य है। परंतु, भारत में, दिन के ट्रक स्टॉप्स के लिए सबसे विश्वसनीय और सुविधाजनक स्थान हाइवे के 'ढाबे' रहे हैं। बदलते समय के साथ साथ वह अब ना सिर्फ़ खाने और रहते का इंतेज़ाम करते हैं बल्कि उन्होंने अपनी सर्वीसज़ को बढ़ाते हुए सस्ते ट्रक रिपेयर की भी सुविधा उपलब्ध करवाना शुरू कर दी है। इस तरह उन्होंने एक ही रूट पर चलने वाले ड्राइवर्स को, जो वहीं खाना-रहना करते हैं, कस्टमर्स से क्लाइंट में बदल लिया है।

इंश्योरेंस

कार्गो के लिए कुछ साल पहले तक इंश्योरेंस बिल्कुल अनऑर्गनाइज़्ड था। लेकिन आज कल कई सारी फ्रेट कंपनीज़ कार्गो सर्वीसज़ के साथ साथ इंश्योरेंस कवर भी प्रदान करने लगी हैं। इस के अतिरिक्त, सभी मॅन्यूफॅक्चरर्स अब कार्गो व्हीक्ल्स का इंश्योरेंस प्रदान करने लगे हैं, जिसको की समय समय पर रिन्यू करवाया जा सकता है। इस के बावजूद कई लोग सफ़र के दौरान समान का इंश्योरेंस करवाने से कतराते हैं। कॅरेज बाय रोड एक्ट 2007 के मुताबिक कार्गो की सेफ्टी की ज़िम्मेदारी कॅरियर (यानी कार्गो कंपनीज़) पर है, और यही वजह है की किसी एक्सीडेंट होने पर, इंश्योरेंस ना करवाने की सूरत में, दोनों पार्टीज़ के बीच टकराव हो जाता है।

आई टी सर्वीसज़

बदलते समय के साथ ट्रक इंडस्ट्री के मॅनेज्मेंट में इन्फर्मेशन टेक्नालजी (आई टी) एक बड़ा महत्त्वपूर्ण रोल अदा कर रही है। जीपीएस की मदद से फ्लीट ओनर्स या कार्गो कंपनीज़ अपने ट्रक्स की मूव्मेंट पर कड़ी नज़र रख पाते हैं। इस के साथ साथ टेलीमेटिक्स एक और बड़ा टेक्नोलोजीकल एड्वान्स्मेंट सिद्ध हुआ है जो की व्हीकल को सड़क पर चलते समय कनेक्टेड रहने में मदद करता है। आईटी कई सारे ऑटोमेशन कार्यों जैसे अकाउंटिंग, रिसौर्स प्लॅनिंग और गूड्स व व्हीक्ल्स के मॅनेज्मेंट के लिए भी लाभदायक सिद्ध होता है।

फाइनेन्सिंग

कई सारी फाइनेन्सिंग सर्वीसज़ जैसे की कमर्शियल व्हीकल फाइनेँसेर्स, नोन बॅंकिंग फाइनेन्सिंग सर्वीसज़ और साथ ही बहुत से साहूकार भी कमर्शियल व्हीकल की खरीद में शामिल रहते हैं।

ट्रक यूनियन्स / असोसियेशन्स

ट्रक यूनियन्स / असोसियेशन्स का इस्तेमाल आज कल ट्रकिंग इंडस्ट्री के अपने अधिकार माँगने के लिए होता है। लेकिन वह फिर भी एक मज़बूत संघटन के रूप में गवर्नमेंट द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं कई सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों को शेयर करने में, और साथ ही ड्राइवर्स के दर्मियान अनुशासन और प्रोफेशनलइज़म लाने के लिए।

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