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शुरुआत करने वालों के लिए गाइड 1: रोड़ ट्रांसपोर्ट बनाम रेल ट्रांसपोर

Published On Jul 27, 2016By लिसा प्रधान

भारत में ट्रांसपोर्ट सेक्टर 8.5 फीसदी प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है और इसका जीडीपी में 6.5 फीसदी हिस्सा है। ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर इंडियन इकॉनॉमी की लाइफलाइन है और यह अन्य कई तरह की इंडस्ट्रीज की ग्रोथ के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, जिन में एग्रीकल्चर, माइनिंग, कंस्ट्रक्शन आदि शामिल हैं। भारत में किराए/भाड़े वाली इंडस्ट्री जैसे रेल, रोड़, एयर तथा पानी के स्तर पर ट्रांसपोर्टेशन में हाल ही में प्रतिस्पर्धात्मक रूप में आ चुकी है। एक स्थान से दूसरे स्थान पर सामान ले जाने के इन सभी माध्यमों में सड़क परिवहन तथा रेल परिवहन विश्वसनीय तथा सबसे पमुख है और पूरे भारत में अधिक से अधिक काम में लिए जाते हैं। शुरूआत करने वालों के लिए इस गाइड में हम आपको भारत में प्रमुख रूप से काम में लिए जाने वाले ट्रांसपोर्टेशन के तरीकों (रेल परिवहन और सड़क परिहन) के साथ उन के जीडीपी और अन्य सामान ढ़ाने के ट्रैफिक के बारे में बताएंगे।

रोड़ बनाम रेल का फ्रेट ट्रैफिक

सभी तरह के ट्रांसपोर्टेशन जैसे कि सड़क परिवहन, रेल परिवहन, पाइन लाइन्स, कोस्टल शिपिंग, आंतरिक जल परिवहन और हवाई परिवहन आदि को भारत में सामान ढ़ोने के काम में लिया जाता है। हालांकि इन सब में सामन लाने और ले जाने के मामले में सड़क परिवहन और रेल परिवहन सबसे प्रमुख है। हालांकि हालिया तौर पर ट्रांसपोर्टेशन में प्रमुख स्थान रखने के बाद अब कुछ बीते वर्षों से सड़क परिवहन ने रफ्तार पकड़ ली है।


जहां सन 1950-51 में रेल का इस मामले में शेयर 80 फीसदी था, वहीं अब सड़क परिवहन का 2011-12 में 65 फीसदी शेयर हो चुका है। हालांकि इंडियन रेलवे दुनिया में चौथे नंबर का है सिस्टम है जो कि प्रतिवर्ष करोड़ों टन का माल ढ़ोता है, लेकिन इस फ्राइट ट्रैफिक में जबरदस्त ग्रोथ के बावजूद रेल परिवहन ने साल 2015-16 में महज 1 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की। जबकि पिछले सालों में यह आंकड़ा 4 फीसदी से 4.5 फीसदी का था।


हालांकि रेल परिवहन में यह कमी आने के कई कारण है। लेकिन लिमिटेड क्षमता, ज्यादा दरें और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते सड़क परिवहन ने रेल परिवहन को पिछले कुछ सालों में पीछे छोड़ दिया है। इस के अलावा इंडियन रेल्वे ग्राहकों के अनुसार चाही गई सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवाने में सक्षम नहीं है। जब कि सड़क परिवजन विकसित हो चुका है और यह डोर टू डोर सर्विस शुरू कर चुका है, और इसी वजह से ट्रक्स की मांग भी बढ़ी है।

ट्रांसपोर्ट के मोड्स का जीडीपी शेयर

जीडीजी में ट्रांसपोर्ट का एक प्रमुख रोल होता है। इंडिया की जीडीपी में ट्रांसपोर्ट सेक्टर की भूमिका वाला शेयर साल 2001-02 में 6 फीसदी और साल 2012-13 में 6.7 फीसदी बढ़ा है। इस ट्रांसपोर्ट सेक्टर में आई बढ़ोतरी में सड़क परिवहन में 3.9 फीसदी से 4.9 फीसदी की बढ़त है जो कि पिछले कुछ सालों के दौरान आई है। वही, दूसरी तरफ रेल परिवहन ने देश की जीडीपी में साल 2001-02 के दौरान 1.2 फीसदी कमी और साल 2012-12 में 0.9 फीसदी की कमी दर्शायी है।

हालांकि इन सालों के दौरान अन्य परिवहन सेक्टर्स जैसे की जल, हवा और अन्य का हिस्सा लगभग वैसा ही रहा जैसा पहले था।


फ्रेट ट्रैफिक का प्रोजेक्शन

नेशनल ट्रांसपोर्ट डेवलमेंट पॉलिसी कमेटी (एनटीडीपीसी) के फ्राइट ट्रैफिक के एक प्रोजेक्शन के अनुसार जिस में सड़क और रेल का साल 2031-32 में शेयर 50:50 होने का बताया गया है। जबकि साल 2016-17 में यह शेयर रेसियो 35:65 फीसदी का है। ये भविष्यवाणियां जीडीपी की तुलना में आंकी गई 1.2 फीसदी अधिकतक ग्रोथ रेट के आधार है।

आने वाले 15 सालों के दौरान किराया परिवहन में 15 फीसदी की यह ग्रोथ कार्बन एमिशन को ध्यान में रखते हुए है। यह फ्रेट इंडस्ट्री को ट्रांसपोर्टेशन जैसे कि रेल परिवहन और सड़क परिवहन पर ध्यान देने के लिए अवगत कराने वाली है। हालांकि साल 2011-12 में 1000 बीटीकेएम के आंकड़े वाला सड़क किराया साल 2031-32 में 4000 बीटीकेएम होगा।

निष्कर्ष

हालांकि सड़क ट्रांसपोर्टेशन अभी बढ़त पर है तथा लेकिन और ऑनर्स को पॉल्युशन स्तर कम करने की भी जरूरत है जिन में विशेष तौर पर हेवी ट्रक्स ध्यान देने वाली बात है। यदि इस समय इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में फ्राइट ऑनर्स को अन्य एनवायरमेंटल फ्रेंडली ट्रांसपोर्टेशन के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। जिसकी वजह से फ्राइट ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में भूचाल आ सकता है।

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