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ऑटो एक्स्पो 2016: बसेस और ट्रक्स ने फॉलो किया एकोलॉजिकल ट्रेंड

Published On Feb 08, 2016By लिसा प्रधान

ऐसा लगता है की ऑटो एक्स्पो 2016 ईको फ्रेंड्ली (पर्यावरण के अनुकूल) प्रॉडक्ट्स के लिए एक प्रभावपूर्ण स्टेज साबित हो रहा है। और इसके पुख़्ता सबूत तब मुहैय्या हुए जब दिल्ली में चल रहे इस इवेंट में बस और ट्रक मॅन्यूफॅक्चरर्स ने अपने अपने एकोलॉजिकल व्हिकल्स को प्रदर्शित किया।

स्कैनिया कमर्शियल व्हीक्ल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने ऑटो एक्स्पो 2016 में अपनी बियो फ़्यूल संचालित सिटी वाइड बस पर से परदा उठाया। इस पर बोलते हुए, स्कैनिया के मॅनेजिंग डाइरेक्टर, श्री मिकाइल बेंजे, ने कहा की, कंपनी की सिटी वाइड बस उन कई सारे प्रॉडक्ट्स में से एक है जिनको कंपनी अपने सॅस्टेनएबिलिटी पर फोकस के तहत मार्केट में उतरेगी।

उन्होंने आगे बताया की, "यह सिटी वाइड बस डीज़ल, बियो फ़्यूल, बियो गेस, और इथेनोल पर चल सकती है। हम बियो गेस प्रॉजेक्ट का भी सेट अप करने का प्लान कर रहे हैं जहाँ वेस्ट का इस्तेमाल बसेस के लिए फ़्यूल जेनरेट करने में किया जाएगा ।"

पर्यावरण की जागरूकता को और आगे ले जाते हुए, जेबीएम ने प्रीमियम बस मेकर, सोलेरिस बस एंड कोच, के साथ मिल कर, भारत के लिए अपनी पहली इलेक्ट्रिक बस को अनवील किया, जिसका नाम ईकोलाइफ है। लीथियम बॅट्रीज़ से संचालित यह ज़ीरो एमिशन मोटर एक चार्ज में 150 किलो मीटर से 200 किलो मीटर का फासला तय करने में सक्षम है।

इस मौके पर बात करते हुए, जे बी एम ग्रूप के एग्ज़िक्युटिव डाइरेक्टर, श्री निशांत आर्या ने कहा, "जैसा की प्रदूषण मेट्रो सिटीज़ में एक गंभीर चिंता का विशय बना हुआ है, यह अनिवार्य हो गया है की हम जल्द से जल्द अपने मास ट्रांसपोर्ट को फ़ॉसिल फ़्यूल से नोन फ़ॉसिल फ़्यूल के तरफ ले जाएँ। हम समझते हैं की इसके लिए इलेक्ट्रिक बस सबसे बेहतर समाधान है ।"

इसी मुहिम को आगे बढ़ते हुए, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी इलेक्ट्रीकली ऑपरेटेड कमर्शियल वेन सुपरो प्रदर्शित की। इस के अल्वा, कंपनी ने अपनी एक हाइड्रोजन बस भी शोकेस की जो की इस ने आइआइटी और मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी के सहयोग से विकसित की है। कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया की, "हम ने पर्यावरण के अंतर्गत जागरूकता लाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्कूटर और इलेक्ट्रिक सेडान पेश की है ।"

ऑटो एक्स्पो की अन्य मुख्य आकर्षण थे ऐसे टाइयर्स जो की इलेक्ट्रीसिटी पैदा करते हैं। टायर प्रमुख गुड इयर टायर एंड रब्बर कंपनी ने यह इलेक्ट्रिक टायर कॉन्सेप्ट डेवलप किया है, जिस को कंपनी जल्द ही कस्टमर्स के लिए उपलब्ध कराएगी।

गुड इयर के वाइस प्रेसीडेंट श्री माइक र्वतोकोस्की ने कहा की, "यह टायर इलेक्ट्रीसिटी जानरेट करता है और इस के अंदर लगे हैं हीट और मोशन सेन्सर्स। यह टायर से हीट कॅप्चर करता है और इसको इलेक्ट्रीसिटी में कंवर्ट कर देता है। इस तरह, यदि आपके पास इलेक्ट्रिक कार है तो यह उसको चलते चलते रीचार्ज तो कर ही सकता और साथ ही जब यह पार्किंग की स्थिति में हो तब भी चार्ज कर सकता ह। धूप में, जब आपकी कार पार्क है, तो यह सूरज की किरणों से हीट अब्ज़ॉर्ब करके उसको इलेक्ट्रसिटी में कंवर्ट कर देगा ।"

जैसे जैसे प्रदूषण पर जागरूकता बढ़ती दिख रही है और एयर क्वालिटी खराब होती जा रही है, तो मॅन्यूफॅक्चरर्स भी तेज़ी से पर्यावरण की ज़रूरतों के हिसाब से जागरूक हो रहे हैं। साल 2020 तक, भारत की छ: मिलियन इलेक्ट्रिक व्हीक्ल्स को रोड पर लाने की योजना है। इसी सन्दर्भ में, गवर्नमेंट 2.2 मिलियन से 2.5 मिलियन टन का फ़्यूल बचाने की उम्मीद कर रही है, जिस के परिणाम स्वरूप 14000 करोड़ रुपये से 15000 करोड़ रुपये की बचत होगी। यह पहल कार्बन डाइऑक्साइड को करीब 1.5 प्रतिशत तक कम करने में कारगर साबित होगी और साथ ही अगले दो सालों में इलेक्ट्रिक व्हीक्ल्स की सेल्स को 800,000 यूनिट्स तक ले जाने में मददगार साबित होगी।

एन्वाइरन्मेंट को एक प्राइमरी क्न्सर्न (मुख्य चिंता) के रूप में लेते हुए, मार्केट लीडर्स टाटा मोटर्स और अशोक लीलेंड ने भी ऑटो एक्स्पो 2016 में अपनी इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड बसेस शोकेस कीं।

टाटा मोटर्स ने हाइब्रिड सीएनजी बस और अल्ट्रा इलेक्ट्रिक बस को इस इवेंट में प्रदर्शित किया। इसी रणनीति को फॉलो करते हुए, अशोक लीलेंड ने भी अपनी 'हाइ बस' लॉंच की, जो की एक सीएनजी हाइब्रिड बस है, और साथ ही अपना एक बीएस 6 (भारत स्टेज 6) कंप्लाइयेंट ट्रक भी अनवील किया। इस के अतिरिक्त, टोयोटा मोटर्स और ह्युंडई मोटर्स भी इस अनोखे ग्रीन कार मूव्मेंट से जुड़ते दिखे। टोयोटा ने शोकेस की 'मीराई' डिसप्ले की, एक ऐसा फ़्यूल सेल व्हीकल जिस का फोकस ज़ीरो कार्बन डाइऑक्साइड एमिशन है। वहीं दूसरी तरफ ह्यूंडई ने अपना मशहूर सोनाटा का हाइब्रिड वर्ज़न पेश किया।

पर्यावरण संबंधी इस ग्रीन रेवोल्यूशन के संरक्षण के बारे में संदेह जताते हुए, रेनो मोटर्स ने इन प्रॉडक्ट्स की घरेलू मार्केट में फिज़िबिलिटी पर संदेह किया है। इस पर बात करते हुए, रेनो एसए के वाइस प्रेसीडेंट, श्री गेरार्ड डिटोर्बाइ ने कहा की, "हमारे पास बहुत सारे सल्यूशन्स मौजूद हैं। हम इस तारह की कार्स दुनिया भर में बहुत से अन्य देशों में बेच रहे हैं। भारत एक बेहत सेन्सिटिव मार्केट है। जब आप अपनी कार में कॉस्ट जोड़ते हैं, तो आप निश्चित नहीं है की आपको इसके कस्टमर्स मिल ही जाएँगे। यह समस्या है भारत में। और साथ ही यह उभरता हुआ मार्केट भी है। हमारा लक्ष्य इस समय इस तरह की टेकनोलॉजी को नहीं लाना नहीं है, बल्कि अपना मार्केट शेयर बढ़ाना है। हम इस तरह की टेकनोलॉजी ला सकते हैं, लेकिन यह काफ़ी महँगी है "।

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