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आर्मी ट्रक्स: भारतीय सशस्त्र बल की लाइफ लाइन

Published On Oct 05, 2016By Mukul Yudhveer Singh

सरहदों की हिफ़ाज़त करना दुनिया के सबसे मुश्किल कामों में से एक है। यह काम और भी ज़्यादा मुश्किल तब हो जाता है जब किसी देश की सरहद (बॉर्डर) भारत जैसी हो। जहाँ हर तरफ हर दिशा से दुश्मन की नज़र आप पर टिकी है, इस में अब तक भारतीय डिफेन्स फोर्सस ने सराहनीय काम किया है। लेकिन अक्सर ऐसा होता है की जब हम बात करते हैं अपने आर्म्ड फोर्सस (सशात्र बल) के बारे में तो हम उस सपोर्ट सिस्टम के बारे में बात नही करते जो उन्हें उनके मकसद में कामयाबी दिलाने में मदद करता है। तो आज हम आपको जानकारी देंगे ट्रक्स के बारे में जो की भारतीय आर्मी द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं, ऐसे ट्रक्स जो की सपोर्ट सिस्टम का एक बेहद महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं।

इन ट्रक्स की तुलना उन 'रथो' से भी की जा सकती है, जो अच्छे और बुरे की जुंग में, पांडवों द्वारा इस्तेमाल किए गये थे कौरवों को पराजित करने के लिए, वह ऐसे विशाल रथ हुआ करते थे जिस में भगवान सवार हो कर मानवता की रक्षा के लिए राक्षसों का सर्वंश करते थे।

आर्मी जिन ट्रक्स और स्माल पिक अप्स व्हीक्ल्स का इस्तेमाल जवानों के लिए करती है वह उनके लिए लाइफलाइन की तरह होते हैं। यह दूर दराज़ की बॉर्डर लोकेशन्स में खाना और दवाइयाँ पहुँचने का एक मात्र ज़रिया होते हैं।

जिनको नहीं पता उनको हम बता दें की यह ट्रक्स ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में प्रयोग होने वाले ट्रक्स से काफ़ी हद तक अलग होते हैं। यह ज़्यादा सुरक्षा के लिए भारी तरीके से बख़्तरबंद होते हैं और इन में से कई तो सूपर चार्ज्ड भी होते हैं। इन में इस्तेमाल होने वाली टेक्नॉलॉजी आम ट्रक्स की टेक्नॉलॉजी से काफ़ी ज़्यादा एडवांस और अलग होती है।

तो चलिए एक नज़र डालते हैं आर्मी ट्रक्स से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में।

- यदि आप सोच रहे हैं की देश में मौजूद डिफेन्स फोर्सस लोगों को ट्रांसपोर्ट करने के लिए ट्रक्स का ही इस्तेमाल क्यों करती है, बसेस का क्यों नहीं, तो आप को बता दें की वह इनका इस्तेमाल इसलिए करते हैं क्योंकि फौज को, आपातकाल (एमर्जेन्सी) की स्थिति में, इन में से उतरना और चढ़ना बसेस की अपेक्षा में काफ़ी तेज़ होता है।

- डिफेन्स फोर्सस के लिए बनाए गये ट्रक्स रोज़मर्रा की ज़िंदगी में देखे जाने वाले ट्रक्स से विभिन्न होते हैं। यह बख़्तरबंद होते हैं व अक्सर ऑल टायर ड्राइव सिस्टम्स के साथ लैस होते हैं, और आप पर अब तक सिर्फ़ अपने ही 4X4 का ही जुनून सवार था।

- ज़्यादातर रोड्स जिन का इस्तेमाल आर्मी ट्रक्स करते हैं वह बी आर ओ द्वारा मेनटेन किए जाते हैं। यहाँ बी आर ओ का मतलब है बॉर्डर रोड ऑर्गनाइज़ेशन और इन के पास अपनी खुद की फ्लीट मौजूद है जो की यह सारा मेंटैनेस का काम देखती है। बीआरओ सचमूच में इंडियन आर्म्ड फोर्सस के लिए एक ब्रदर (भाई) की तरह है।

- आर्मी ट्रक्स के पास अलग तरह की रेजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट होती है जो की देश भर में उनकी आसान मूव्मेंट को सुनिश्चित करती है। इस साथ ही आर्मी के लिए भी उनके ट्रक्स को पहचानना आसान हो जाता है और साथ ही उनका ट्रेक रखने में भी आसानी रहती है।

- भारतीय सेना के पास खुद की ब्रिड्ज बनाने वाली मशीनें भी मौजूद हैं जिन का वह खूब इस्तेमाल करती इस काम में। यह एडवांस मशीनें ब्रिड्ज बना सकती जिसके लिए वह हज़ारों टन का वजन उठाने में सक्षम हैं।

- डिफेन्स फोर्सस भारत में अपने दस्तों और अन्य सामानों के ट्रांसपोर्ट के लिए इन पिक अप्स का खासतौर से उपयोग करती हैं। कई मामलों में यह तुरंत रेस्पोन्स व्हीक्ल्स के रूप में भी इस्तेमाल होते हैं।

भारत की आर्म्ड फोर्सस इन ट्रक्स पर बहुत निर्भर करती हैं। एक जवान से पूछिए, जो की अपने दस्ते के साथ हमेशा रहता है जो हमेशा चलता रहता है, और आप समझेंगे की उसके लिए सेना के यह व्हीक्ल्स कितने महत्ववपूर्ण हैं। ट्रक्सदेखो भारतीय आर्मी को और उनके जाँबाज़ ट्रक्स सलाम करती है जो की दुश्वारियों से भरे बॉर्डर के हालातों का डटकर सामने करने में मदद करते हैं।

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