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महिंद्रा का 11वाँ एमपावर बेच हुआ समाप्त

Published On Dec 08, 2016By Mukul Yudhveer Singh

शनिवार, 19 नवंबर 2016 को एमपावर के 11वें बेच का शुभारंभ इंडियन इन्स्टिट्यूट ऑफ मेनेजमेंट, अहमदाबाद (आईआईएमए) में किया गया था। एमपावर एक मेनेजमेंट डेवेलपमेंट प्रोग्राम है जो की नई पीढ़ी के नौजवान ट्रांसपोर्ट एन्त्रेप्रेनेउर्स को ध्यान में रख कर डिज़ाइन किया गया है।

11वें एमपावर प्रोग्राम का समापन 26 नवंबर 2016 को हुआ। इस बेच में कुल 13 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। हालाँकि, कुल 32 कन्फर्म नॉमिनेशन्स प्राप्त हुए थे, परंतु अंतिम उपस्थिति केवल 13 प्रतिनिधियों तक ही सीमित रही। इस का कारण रहा ट्रांसपोर्ट बिज़नेस पर पढ़ रहा नोट बंदी का असर, कारणवश 19 परिभागियों से इस अचानक आई परिस्थिति से निपटने के लिए बेच में से अपने नाम वापस ले लिए। लेकिन फिर भी, 13 प्रतिभागियों के साथ भी उत्साह और सहभागिता का मेयार शानदार था, और सभी डेलिगेट्स की प्रोफाइल बेहद असरदार और अधभूत थी। यह पहला बेच था जिस में एक विशेषरूप से विकलांग प्रतिभागी श्री चेतन लोदया थे, जो की चेतन रोड कॅरियर के प्रतिनिधि थे।

यह प्रोग्राम अपने अनोखे मार्गदर्शन के द्वारा भारत की आने वाली युवा पीढ़ी के ट्रांसपोर्टर्स अथवा फ्लीट ओनर्स नई राह दिखा रहा है ताकि वह "अपने फॅमिली बिज़नेस को अपने विज़न के सहारे आगे ले जाने में सक्षम रहें", यह श्री आनंद महिंद्रा द्वारा 9 जनवरी 2013 को कहा गया था, इस प्रोग्राम के लॉंच के समय, महिंद्रा ट्रांसपोर्ट एक्सलेन्स अवॉर्ड्स सेरेमनी के दौरान। उसी कार्यक्रम के दौरान मीडीया से बात करते हुए श्री नलिन मेहता, जो सीईओ महिंद्रा ट्रक एंड बस डिवीज़न (एमटीबीडी) के ने इस बात पर ज़ोर दिया था की एमटीबीटी 'जो कहेगा वो करके दिखाएगा' और साथ ही उस समय करीब साल भर पहले उन्होंने नई पीढ़ी के ट्रांस्पोटर्स से आग्रह किया था, की वह अपने "पापा के बिज़नेस" से जुड़ें हमारे टीवी और मास मीडीया कॅंपेन के मध्यम से। एमपावर प्रोग्राम लगातार नई बुलंदियाँ छूता दिखाई दे रहा है और साथ ही भारतीय ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री में हमारी पहल को भी दर्शाता है। यदि हम आँकड़ों की बात करें तो इस बेच के साथ उन्होंने 291 नई पीढ़ी के नौजवानों को जोड़ा है जो कुल मिलकर 59300 ट्रक्स के मालिक हैं, और साथ ही करीब 50 प्रतिशत ट्रक्स मार्केट से इस्तेमाल करते हैं। इस तरह इस का कंबाइंड टर्न ओवर 24900 करोड़ रुपये तक हो जाता है जिस के मध्यम से 66500 लोगों को रोज़गार के अवसर मिलते हैं।

एमपावर के ग्यारहवें संस्करण के 13 जवान ट्रांसपोर्ट एन्त्रेप्रेनेउर्स, जो की इन्विटेशन द्वारा चुने गये थे, इन का संबंध भारत की सबसे चुनिंदा ट्रांसपोर्ट कंपनीज़ से है। आठ दिवसीय कोर्स, जिस का मकसद भारतीय ट्रांसपोर्ट सेक्टर को आने वाले समय के लिए तैयार करते हुए प्रोफेशनलाइज़ करना है। इस कोर्स का मसौदा खास तौर से ट्रांसपोर्ट सेक्टर में उत्पन्न होने वाली समस्याओं को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है। आईआईएमए के आठ अत्यधिक निपुण और दक्ष फॅकल्टी मेंबर्स कोर्स को कवर कर रहे हैं जिस में सब्जेक्ट्स जैसे की प्रोफेशनलिज़म, बिज़नेस प्लॅनिंग, मार्केट एंड सेगमेंट्स, ह्यूमन रेसौर्स प्रेक्टिस, सर्विस क्वालिटी, फाइनेंशियल मेनेजमेंट एंड अकाउंटिंग, सप्लाइ चैन मेनेजमेंट, लीगल एंड रेग्युलेटरी, इन्फर्मेशन टेक्नॉलॉजी व इंडस्ट्री पर ख़ास ध्यान देने देने वाले शामिल हैं।

एमपावर के पिछले 10 बेचेस की बड़ी सफलता सिर्फ़ युवा पीढ़ी के नौजवानों के साथ भावनात्मक जुड़ाव तक ही सीमित नहीं थी बल्कि, महिंद्रा के द्वारा किए जा रहे बिज़नेस और उस से संबंधित कंपनी की पेशकशें को भी उन से अवगत कराना व साथ ही जिन लोगों ने प्रोग्राम अटेंड किया था, उन के साथ नया बिज़नेस रीलेशन शुरू करने में भी मदद मिली। इस सफल प्रोग्राम ने एमटीबीडी को प्रोत्साहित किया ट्रांसपोर्ट प्रणाली में दोबारा से निवेश करने के लिए व इस के ईको सिस्टम में एक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए और साथ साथ अपने बिज़नेस को बढ़ावा देने के लिए। वह इस बात को लेकर आश्वस्त है की यह प्रोग्राम, महिंद्रा ट्रांसपोर्ट एक्सलेन्स अवॉर्ड्स जैसे प्लेटफॉर्मस के साथ मिलकर आगे भी सफलता के नये झंडे गाड़ेगा। इस तरह के सभी इनिशियेटिव्स एमटीबीडी को भारतीय ट्रांसपोर्ट ईको सिस्टम के कई अन्य घटकों के साथ संपर्ट बनाने में मदद करेगा दोनों तर्कसंगत और भावनात्मक स्तर पर। जिस को साथ लेकर महिंद्रा ट्रक्स एंड बस डिवीज़न को मार्केट में एक मज़बूत उपस्थिति मिलेगी।

ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री की सभी चुनोतियों दर्शाने के बाद, प्रोफेसर से नोट बंदी पर अपना नज़रिया रखने का आग्रह किया गया। यहाँ कई अलग अलग तरह के दृष्टिकोण प्राप्त हुए, कइयों ने इस कदम की सराहना की व कई ने इस बात का खुलासा किया की वह पहले से ही केशलेस लेनदेन की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। उन सभी ने एक ही समस्या उठाई और वो थी ड्राइवर्स, ढाबे वाले, मेकॅनिक्स और अन्य व्यवसाय से जुड़े लोगों के पेमेंट्स का मुद्दा, जो की ट्रांसपोर्ट चक्र के सबसे नीचे वाले पायदान पर आते हैं। क्योंकि, इन लोगों ने अभी तक केशलेस फसिलिटीज़ की शुरुआत नहीं की है। यह भी एक अच्छा मौका था कुछ ट्रांसपोर्टेर्स के लिए जिन्होंने अभी तक केशलेस ट्रांसेक्शन प्रोसेस अपनी फर्म में शुरू नही की थी और अपने बेच में मौजूद साथियों से उन्हें इस के लिए ज़रूर आइडियज़ मिले होंगे की किस तरह से इस को अपने बिज़नेस में लागू करना है।

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